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Physics in hindi,Physics question in hindi,Quantum physics in hindi,physics class 12 in hindi

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  1. इकाई समय में तय की गई दूरी चाल कहलाता है ।
  2. इकाई समय में निश्चित दिशा में तय की गई दूरी वेग कहलाता है ।
  3. सदिश राशियों को परिमाण और दिशा दोनों होते है , जबकि अदिश राशिओं में केवल परिमाण होता है ।
  4. चाल एक अदिश राशि है , जबकि वेग एक सदिश राशि है ।
  5. किसी वस्तु द्वारा निश्चित दिशा में स्थान परिवर्तन विस्थापन कहलाता है ।
  6. विस्थापन शून्य हो सकता है लेकिन तय की गई दूरी शून्य नहीं होता है ।
  7. वेग में प्रति इकाई समय में होने वाले परिवर्तन को उस पिण्ड का त्वरण ( Acceleration ) कहते है ।
  8. त्वरण और विस्थापन दोनों ही सदिश राशियाँ है ।
  9. न्यूटन के प्रथम गति नियम के अनुसार- ‘ कोई वस्तु गतिशील है , तो वह गतिशील और स्थिर है तो वह स्थिर ही रहना चाहती है । जब तक की उस पर कोई बाहरी बल कार्य न करे ।
  10. विराम के जड़त्व के कारण रूकी हुई गाड़ी को अकस्मात चलने से यात्री पीछे की ओर झुक जाता है । W गति के जड़त्व के कारण चलती हुई गाड़ी को अचानक रूकने पर यात्री आगे की ओर झुक जाता है ।
  11. विराम के जड़त्व के कारण डंडे से प्रहार करने पर कोट की धूल झड़ जाती है ।
  12. न्यूटन के प्रथम गति नियम से बल की परिभाषा प्राप्त होती है ।
  13. बल वह भौतिक कारण है जो किसी वस्तु पर लगकर उसकी अवस्था में परिवर्तन लाता है या लाने की चेष्ठा करता है ।
  14. किसी पिण्ड द्वारा इकाई समय में ध्रुवान्तर पर बनाया गया कोण कोणीय वेग कहलाता है ।
  15. कोणीय वेग का मात्रक रेडियन प्रति सेकेण्ड , होता है ।
  16. न्यूटन के प्रथम गति नियम को जड़त्त्व का नियम या गैलिलियो का नियम भी कहते है ।
  17. किसी वस्तु के मात्रा और वेग के गुणनफल को संवेग कहते है ।
  18. न्यूटन के द्वितीय गति नियम के अनुसार ‘ किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस वस्तु पर आरोपित बल के समनुपाती तथा द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है , और त्वरण की दिशा बल की दिशा में होती है ।
  19. न्यूटन के द्वितीय गति नियम से बल का ( व्यंजक प्राप्त होता है ।
  20. यदि कोई बल किसी वस्तु पर बहुत ही कम समय तक कार्यरत रहे तो बल और समय के गुणनफल को उस वस्तु का आवेग कहते है ।
  21. जिस बल का परिणमी शून्य नहीं होता है , उसे असंतुलित बल कहा जाता है ।
  22. न्यूटन के तृतीय गति नियम के अनुसार ‘ प्रत्येक क्रिया के बराबर , परन्तु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है ।
  23. संवेग संरक्षण के सिद्धांत के अनुसार यदि कणों के किसी समूह पर कोई बाह्य बल नहीं लग रहा हो तो उस निकाय का कुल संवेग अपरिवर्तित रहता है ।
  24. अभिकेन्द्री बल ( Centipetal Force ) में , वस्तु वृताकार मार्ग पर चलती है , तो उस पर बल , वृत के केन्द्र की ओर से कार्य करता है ।
  25. अपकेन्द्री बल ( Centrifugal Force ) में प्रतिक्रिया बल वृताकार पथ पर चलायमान वस्तु द्वारा अन्य वस्तु पर लगता है ।
  26. पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर घूमना तथा इलेक्ट्रॉन का नाभिक के चारों ओर घूमना अभिकेन्द्रीय बल का उदाहरण है ।
  27. कपड़ा सुखाने की मशीन तथा दूध से मक्खन निकालने वाली मशीन अपकेन्द्रीय बल के सिद्धांत पर कार्य करता है । ( बल द्वारा एक पिण्ड को एक अक्ष के परितः घूमने की प्रवृति को बल आघूर्ण कहते है ।
  28. बल आघूर्ण एक सदिश राशि है और इसका मात्रक न्यूटन मी ० होता है ।
  29. किसी पिण्ड का भार वह बल है , जिससे पृथ्वी उसे अपने केन्द्र की ओर खींचती है ।
  30. जब बल द्वारा किसी वस्तु में विस्थापन उत्पन्न किया जाता है , तो इसे कार्य होना समझा जाता है । कार्य की माप लगाए गए बल तथा बल की दिशा में वस्तु के विस्थापन के गुणनफल के बराबर होता है ।
  31. कार्य करने की दर शक्ति कहलाता है जबकि कार्य करने की क्षमता उर्जा कहलाता है ।
  32. कार्य और ऊर्जा का मात्रक जूल है , जबकि शक्ति का मात्रक वाट है ।
  33. ऊँचाई पर स्थित वस्तु , स्प्रिंग , बाँध बनाकर रोके गए जल आदि में स्थितिज उर्जा होती है ।
  34. , घड़ी की चाभी में संचित ऊर्जा स्थितिज होती है ।
  35. ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार “ ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है ।
  36. एक अश्व शक्ति ( HP ) 746 वाट के बराबर हाता है ।
  37. वह न्यूनतम वेग जिसमे प्रक्षेपित करने पर कोई पिण्ड पृथ्वी के गुरूत्वीय क्षेत्र से बाहर निकल जाय , उसे पलायन वेग कहते है । चन्द्रमा पर g का मान पृथ्वी के g का 1/6 गुणा होता है ।
  38. पृथ्वी के लिए पलायन वेग का मान 11.2 किमी / से होता है , जबकि सौरमंडल के लिए पलायन वेग 42 किमी / से होता है तथा चन्द्रमा का 2.4 किमी / से ।
  39. भूस्थिर उपग्रह का घुर्णन काल 24 घंटे के तुल्य होता है , तथा वह पृथ्वी के सापेक्ष स्थिर दिखाई देता है ।
  40. बाब का SI मात्रक न्यूटन / वर्ग मीटर या पास्कल होता है ।
  41. वायुदाब मापी ( बैरोमीटर ) का पारा का अचानक बढ़ जाना यह सूचित करता है कि मौसम स्वच्छ रहेगा ।
  42. पृष्ठ तनाव के कारण वर्षा की बुंदें गोलाकार तथा शेविंग ब्रश को जल से निकालने पर इसके कश आपस में सटे रहते है ।
  43. केशिकत्व ( Capillarity ) के कारण लालटेन की बत्ती में तेल ऊपर चढ़ता है ।
  44. ब्लॉटिंग पेपर से स्याही का सुखाया जाना भी केशिकत्व के कारण होता है ।
  45. ध्वनि तरंगे अनुदैर्ध्य तरंग का उदाहरण है , जबकि प्रकाश तरंगे अनुप्रस्थ तरंगे होती है ।
  46. आवृति को Hz ( ह ) में मापा जाता है ।
  47. ध्वनि का वेग हवा में 332 m / s , जल में 1483 m / s तथा लोहे में 5130 m / s होता है । ध्वनि का वेग पर दाब का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है ।
  48. ध्वनि की चाल तरंगदैर्ध्य एवं आयाम पर निर्भर नहीं करती है ।
  49. एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर ध्वनि की आवृत्ति नहीं बदलती है ।
  50. 20Hz से नीचे की आवृत्ति वाले ध्वनि तरंगों को अवश्रव्य तथा 20Hz से 20000Hz के बीच की आवृत्ति वाले तरंगो को श्रव्य तरंगे कहा जाता है ।
  51. 20000Hz से उपर के तरंगों को पराश्रव्य तरंगे कहा जाता है ।
  52. 20Hz से 20000Hz के बीच के तरंगो को मानव कान सून सकता है ।
  53. कुत्ता , बिल्ली एवं चमगादड़ आदि 20000Hz से उपर की तरंगों को सुन सकते है ।
  54. पराश्रव्य तरंगों का प्रयोग समुद्र की गहराई , ट्यूमर का पत्ता लगाने , वायुयान तथा घड़ियों के पूर्जी को साफ करने में किया जाता है ।
  55. प्रतिध्वनि सुनने के लिए श्रोता एवं परावर्तक सतह के बीच कम – से – कम 10 मी ० की दूरी होनी चाहिए ।
  56. लोलक का आवर्त्तकाल लोलक के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है ।
  57. कान पर ध्वनि का प्रभाव 1/10 सेकेण्ड तक रहता है ।
  58. Cp – Cv = R मेयर सूत्र के नाम से जाना जाता है

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