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गति,चाल,वेग,त्वरण,न्यूटन के गति के नियम,न्यूटन द्वितीय नियम,न्यूटन तृतीय नियम,संवेग संरक्षण का नियम,रॉकेट प्रणोदन

                        गति,चाल,वेग,त्वरण,न्यूटन के गति के नियम,न्यूटन द्वितीय नियम,न्यूटन तृतीय नियम,संवेग संरक्षण का नियम,रॉकेट प्रणोदन

गति विराम और गति ( Rest and Motion ) : यदि किसी वस्तु की स्थिति किसी स्थिर वस्तु के सापेक्ष समय के साथ बदलती रहती है , तो उसे गति अवस्था में कही जाती है , जैसे – चलती ट्रेन जो बिजली पोल या पटरी के किनारे स्थित पेड़ – पौधे के सापेक्ष अपनी स्थिति बदलती रहती है । समय के साथ स्थिर वस्तु के सापेक्ष स्थिति नहीं बदलने पर उसे विराम अवस्था कही जाती है ।

 दूरी ( Distance ) : वस्तु द्वारा किसी समय – अन्तराल में तय किए गए मार्ग की सम्पूर्ण लम्बाई को दूरी कहते है । यह एक अदिश राशि है । यह सदैव धनात्मक होती है ।

 विस्थापन ( Displacement ) : वस्तु की अंतिम स्थिति तथा प्रारंभिक स्थिति के बीच की न्यूनतम दूरी को विस्थापन कहते हैं । विस्थापन एक सदिश राशि है , इसमें परिमाण एवं दिशा दोनों होते हैं । विस्थापन का मान धनात्मक , ऋणात्मक या शून्य कुछ भी हो सकता है ।

चाल ( Speed ) : कोई वस्तु इकाई समय में जितनी दूरी तय करती है , उसे उसकी चाल कहते हैं । चाल एक अदिश राशि है । इसका SI मात्रक मीटर प्रति सेकण्ड ( m / s ) होता है ।

 वेग ( Velocity ) : कोई वस्तु इकाई समय में किसी निश्चित दिशा में जितनी दूरी तय करती है , यानी जितनी विस्थापित होती है , उसे उस वस्तु का वेग कहते हैं । यह एक सदिश राशि है । इसका SI मात्रक मीटर प्रति सेकण्ड ( m / s ) होता है । वेग धनात्मक , ऋणात्मक या शून्य हो सकता है ।

 औसत चाल ( Average Speed ) : ( a ) जब वस्तु भिन्न – भिन्न चालों से समान दूरी तय करती है यदि कोई वस्तु किसी दूरी को , चाल  V1 तय करती है , और उसके बाद V2 उतनी ही दूरी , चाल से तय करती है , तो सम्पूर्ण यात्रा में उसकी औसत चाल =2V1V2/V1+V2 ( b ) जब वस्तु भिन्न – भिन्न चालों से समान समय तक चलती हैं यदि यात्रा के पहले आधे समय में कार की चाल तथा यात्रा के दूसरे आधे समय में कार की चाल छ , हो , तो सम्पूर्ण यात्रा में औसत =2v1v2/v1+v2 चाल

त्वरण ( Acceleration ) : किसी वस्तु के वेग परिवर्तन की दर को उस वस्तु का त्वरण कहते हैं । त्वरण को प्रायः a से सूचित करते हैं । इसका SI मात्रक मीटर प्रति वर्ग सेकण्ड ( m / s ) होता है । यदि वस्तु के वेग में बराबर समयान्तरालों में बराबर परिवर्तन हो रहा है , तो उसका त्वरण ‘ एकसमान ‘ कहलाता है । यदि वस्तु के वेग का परिमाण समय के साथ – साथ बढ़ रहा है , तो वस्तु का त्वरण धनात्मक होता है । यदि वेग का परिमाण घट रहा है , तो त्वरण ऋणात्मक होता है , तब इसे मदन ( Retardation / Deceleration ) कहते हैं ।

न्यूटन के गति के नियम ( Newton’s Laws of Motion ) :

गति के नियमों को सबसे पहले सर आइजक न्यूटन ने सन् 1687 ई में अपनी पुस्मक जिसीपिया ( Principia ) में प्रतिपादित किया । इसीलिए इस वैज्ञानिक के सथान में इन नियमों को न्यूटन के गति नियम कहते प्रथम नियम ( First Law ) कोई वस्तु विराम की अवस्था में है , तो वह विराम की अवस्था में ही रहेगी और यदि वह एकसमान गति से किसी सीधी रेखा में चल रही हो , तो वैसे ही चलती रहेगी , जब तक कि उस पर कोई बाहरी बल लगाकर उसकी अवस्था में परिवर्तन न किया जाय । अर्थात , सभी वस्तुएँ अपनी प्रारंभिक अवस्था को बनाये वस्तुओं की प्रारंभिक अवस्था ( विराम या गति की अवस्था ) में स्वतः परिवर्तन नहीं होने की प्रवृत्ति को जड़त्व ( Inertia ) कहते हैं । इसीलिए यूटन के प्रथम नियम को जड़त्व का नियम भी कहा जाता है । बल दह बाह्य कारक है , जिसके द्वारा किसी वस्तु की विराम अथवा गति की अवस्था में परिवर्तन किया जाता है । अतः प्रथम नियम हमें बल की परिभाषा ( definition of force ) देता है ।

 उदाहरण 1.की हुई गाड़ी के अचानक चल पड़ने पर उसमें बैठे यात्री पीछे की और झुक जाते हैं ।

 2 चलती हुई गाड़ी के अचानक तकने पर उसमें बैठे यात्री आगे की और झुक जाते हैं ।

3 , गोली मारने से काँच में गोल छैद हो जाता है , परन्तु पत्थर मारने पर वह काँच टुकड़े टुकड़े हो जाता है ।

4 कम्बल को हाथ से पकड़कर डण्डे से पीटने पर धूल के कण प्रयकर गिर पड़ते हैं ।

द्वितीय नियम ( Second Law ) :

“ वस्तु के संवेग ( momentum ) में परिवर्तन की दर उस पर आरोपित बल के अनुक्रमानुपाती होती है तथा संवेग परिवर्तन आरोपित बल की दिशा में ही होता है । “ इस नियम को एक अन्य रूप में भी व्यक्त किया जा सकता है- “ किसी वस्तु पर आरोपित बल , उस वस्तु के द्रव्यमान तथा बल की दिशा में उत्पन्न त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है । “ यदि किसी m दव्यमान की वस्तु पर F बल आरोपित करने से उसमें बल की दिशा में त्वरण उत्पन्न होता है , तो द्वितीय नियम के अनुसार , F = ma यदि F = 0 हो , तो a = 0 ( क्योंकि m शून्य नहीं हो सकता है ) अर्थात् यदि वस्तु पर बाहरी बल न लगाया जाए , तो उत्पन्न नहीं होगा । यदि त्वरण का मान शून्य है , तो इसका अर्थ है कि या तो वस्तु नियत वेग से गतिमान है या विरामावस्था में है । इससे स्पष्ट है कि बल के अभाव में वस्तु अपनी गति अथवा विराम अवस्था को बनाए रखती है । गति के द्वितीय नियम से बल का व्यंजक Measure of Force ) प्राप्त होता है । बल के मात्रक ( Units of Force ) : SIपद्धति में बल का मात्रक न्यूटन ( Newton – N ) है | F = ma से , यदि m = 1 किग्रा . तया -1 मीटर / सेकण्ड – हो , तो F = 1 न्यूटन । अतः 1 न्यूटन बल वह बल है , जो 1 किग्रा द्रव्यमान की किसी वस्तु में 1 मीटर / सेकण्ड का वरण उत्पन्न कर दे । बल का एक और मात्रक किग्रा भार है । इस बल को मात्रक कहते है । 1 किग्रा भार उस बल के बराबर है , जो 1 किग्रा की वस्तु पर गुरुत्व के कारण लगता है । न्यूटन के द्वितीय नियम के अनुसार , गुरुत्वीय बल = द्रव्यमान x गुरुत्वीय त्वरण

उदाहरण : 1. समान वेग से आती हुई क्रिकेट गेंद एवं टेनिस गेंद में से टेनिस जो गेंद को कैच करना आसान होता है ।

  1. क्रिकेट खिलाड़ी तेजी से आती हुई गेंद को कैच करते समय अपने हाथों को गेंद के वेग की दिशा में गतिमान कर लेता है ताकि चोट कम लगे ।
  2. गद्दा या मिट्टी के फर्श पर गिरने पर सीमेण्ट से बने फर्श पर गिरने की तुलना में कम चोट लगती है 4. गाड़ियों में स्प्रिंग ( spring ) और शॉक एब्जार्बर ( shock absorber ) लगाए जाते हैं ताकि झटका कम लगे ।
  3. कराटे खिलाड़ी द्वारा हाथ के प्रहार से ईंटों की पट्टी ( slab ) तोड़ना ।
  4. ऊँची कूद ( high jump ) एवं लंबी कूद ( long jump ) के लिए मैदान की मिट्टी खोद कर हल्की कर दी जाती है ताकि कूदने पर खिलाड़ी को चोट न लगे ।
  5. अधिक गहराई तक कील को गाड़ने के लिए भारी हथौड़े का उपयोग किया जाता है ।

      तृतीय नियम ( Third Law ) :

इस नियम के अनुसार “ प्रत्येक क्रिया के बराबर , परन्तु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है । “ अर्थात् दो वस्तुओं की पारस्परिक क्रिया में एक वस्तु जितना बल दूसरी वस्तु पर लगाती है , दूसरी वस्तु भी विपरीत दिशा में उतना वस्तु पर लगाती है । इसमें से किसी एक बल को क्रिया व दूसरे बल को प्रतिक्रिया कहते हैं । इसीलिए इस नियम को क्रिया – प्रतिक्रिया का नियम ( Action – Reaction Law ) भी कहते हैं ।

बल पहली उदाहरण :

        1. बंदूक से गोली छोड़ते समय पीछे की ओर झटका लगना ।

  1. नाव के किनारे पर से जमीन पर कूदने पर नाव का पीछे हटना ।
  2. नाव खेने के लिए बांस से जमीन को दबाना ।
  3. कुआँ से पानी खींचते समय रस्सी टूट जाने पर व्यक्ति का पीछे गिर जाना ।
संवेग संरक्षण का नियम ( Law of Conservation of Momentum ) :

न्यूटन द्वितीय नियम के साथ न्यूटन के तृतीय नियम के संयोजन का एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण परिणाम है संवेग – संरक्षण का नियम । इस नियम के अनुसार “ एक या एक से अधिक वस्तुओं के निकाय ( system ) पर कोई बाहरी बल नहीं लग रहा हो , तो उस निकाय का कुल संवेग नियत रहता है , अर्थात् संरक्षित रहता है । “ इस कथन को ही संवेग संरक्षण का नियम कहते हैं । अर्थात् एक वस्तु में जितना संवेग परिवर्तन होता है , दूसरी में उतना ही संवेग परिवर्तन विपरीत दिशा में हो जाता है । अतः जब कोई वस्तु पृथ्वी की ओर गिरती है , तो उसका वेग बढ़ता जाता है , जिससे उसका संवेग भी बढ़ता जाता है । वस्तु भी पृथ्वी को ऊपर की ओर खींचती है , जिससे पृथ्वी का भी ऊपर की ओर संवेग उसी दर से बढ़ता जाता है । इस प्रकार ( पृथ्वी + वस्तु ) का संवेग संरक्षित रहता है । चूंकि पृथ्वी का द्रव्यमान वस्तु की अपेक्षा बहुत अधिक होता है , अतः पृथ्वी में उत्पन्न वेग उपेक्षणीय होती है । रॉकेट के ऊपर जाने का सिद्धान्त भी संवेग संरक्षण पर आधारित है । रॉकेट से गैसें अत्यधिक वेग से पीछे की ओर निकलती हैं , जो रॉकेट के ऊपर उठने के लिए आवश्यक संवेग प्रदान करती हैं । उदाहरण : 1. जब बराबर संवेग वाली दो गेंदें आपस टक्कर मारती हैं तो गेंदें अचानक रुक जाती हैं । यहाँ निकाय ( दोनों गेदो  का कुल संवेग ( total momentum ) टक्कर ( collision ) के पूर्व शून्य है और टक्कर के बाद फिर से शून्य हो जाती है अर्थात् निकाय का कुल संवेग नियत है या संरक्षित है ।

रॉकेट प्रणोदन ( Rocket Propulsion ) :

किसी रॉकेट की उड़ान उन शानदार उदाहरणों में से एक है जिनमें न्यूटन का तीसरा नियम या संवेग – संरक्षण नियम स्वयं को अभिव्यक्त करता है । इसमें ईंधन की दहन से पैदा हुई गैसें बाहर निकलती हैं और इसकी प्रतिक्रिया रॉकेट को धकेलती है । यह एक ऐसा उदाहरण है जिसमें वस्तु का द्रव्यमान परिवर्तित होता रहता है क्योंकि रॉकेट में से गैस निकलती रहती है । रॉकेट के लिहाज से रॉकेट से निकलने वाली गैसें लगभग स्थायी वेग से गति करती हैं । यदि दहन के दौरान गैस के निकलने की दर स्थायी हो तो संवेग परिवर्तन की दर भी स्थायी होगी । मगर चूँकि निकलने वाली गैसों के द्रव्यमान के कारण रॉकेट का द्रव्यमान कम होता जाता है इसलिए त्वरण स्थायी नहीं रहता । रॉकेट का वेग तथा त्वरण दोनों में ही वृद्धि होगी ।

प्रश्न 1. रॉकेट किस सिद्धांत पर कार्य करता है

उत्तर न्यूटन का तृतीय नियम

प्रश्न 2. अश्व यदि एकाएक चलना प्रारंभ कर दें तो अस्व आरोही के गिरने की आशंका का कारण है

उत्तर विश्राम जड़त्व

प्रश्न 3. क्रिकेट का खिलाड़ी तेजी से आती हुई बॉल को क्यों अपने हाथ को पीछे खींच कर पकड़ता है

उत्तर बोल विश्राम की स्थिति में आ सकती है

प्रश्न 4 न्यूटन के पहले नियम को भी कहते हैं

उत्तर जड़त्व का नियम

प्रश्न 5. बल की परिभाषा आती है न्यूटन के किस नियम से

उत्तर गति के पहले नियम से

प्रश्न 6  बाल गुणनफल है

उत्तर  द्रव्यमान और त्वरण

प्रश्न 7 यदि हम भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाते हैं तो g का  मान

उत्तर बढ़ता है

प्रश्न 8 व्यक्ति पृथ्वी की सतह की तुलना में चंद्रमा की सतह पर अधिक ऊंचाई क्यों उछल सकता है

उत्तर चंद्रमा में गुरुत्वाकर्षण के कारणद त्वरण पृथ्वी की तुलना में कम होता है

 

 

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